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Unhi Ka Diya Hua Ghum Unhi Se Chhipana Pada

Unhi Ka Diya Hua Ghum
Unhi Se Chhipana Pada
Zindagi Naam hi Esi Ka
Hasna Kabhi Rona Pada

power by:- achhiblog
Pramod Kumar Sharma

Meri Saari Umr Ka Falsfa E “Mazhar” Bas Itna Raha

Teri Raah Mai Khada Hun Main
Intjaar-E-Sahar Liye!

Wo Jo Ashk The Teri Aankh Mai
Maine Apni Aankho Mai Bhur Liye !
Tu Bichhad Gaya Jis Mod Se
Main Khada Hun Ab Bhi Wanhi Kanhi..

Ek Bejuba See Sada Liye
Ek Muntjir See Najar Liye !
(intezar karne wala)=Muntjir

Meri Hasraton Ke Bahane Se
Meri Jaa Bhi Aakhir Nikal Gai ..

Chala Ab Tere Janha Se
Main Teri Sab Balayen Sar Liye !

Meri Saari Umr Ka
Falsfa E “Mazhar” Bas Itna Raha ..

Kabhi Khud Ko Gum Mai Duba Liya
Kabhi Apne Gum Se Ubhar Liye !

dard khud dard ko chhu k rone laga hai

16/12/2015 --- 11:30pm
Dard Ko bhi Ab Dard Hone laga hai,
Dard Khud hi Mere Zakham dhone lagha hai,
Dard ke sath kabhi Roye na hum,
Dard Khud hi Humko chhu kar Rone Laga hai ...

यूँ तो मुझे किसी के भी छोड़ जाने का गम नही....

यूँ तो मुझे किसी के भी
छोड़ जाने का गम नही....
बस...कोई ऐसा था .....
जिससे ये उम्मीद नहीं थी !!

उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था,कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था,

कितना दिलकश मंजऱ हो
जब हम कयामत के दिन....
करे शिकवा तेरी बेवफाईका....
और तुम लिपट कर धीरे से हमसे कहो.....
चुप रहो खुदा के लिये.!

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कितनी आसानी से कह दिया तुमने, की बस अब तुम मुझे भूल जाओ,

कितनी आसानी से कह दिया तुमने,
की बस अब तुम मुझे भूल जाओ,
साफ साफ लफ्जो मे कह दिया होता,
की बहुत जी लिये अब तुम मर जाओ.

ज़िंदगी में कभी प्यार करने का मन हो तो, अपने दुखों से प्यार करन

Dird Bhari Sayari in hindi for love

ज़िंदगी में कभी प्यार करने का मन हो तो,
अपने दुखों से प्यार करना क्योंकि,
दुनिया का दस्तूर ह,ै
जिसे जितना चाहोगे उसे उतना दूर पाओगे…!!

न आने का सबब महज मजबूरियाँ रही होंगी

वो बेवफा नहीं है , हमको यकीन है
बस इम्तहान लेने का खुदा शौकीन है
न आने का सबब महज मजबूरियाँ रही होंगी
वरना दोस्ती के कितने ही उनके लम्हे हसीन ह||

दुनिया का दस्तूर है जिसे जितना चाहोगे उसे उतना दूर पाओगे

ज़िंदगी में कभी प्यार करने का मन हो तो,
अपने दुखों से प्यार करना क्योंकि,
दुनिया का दस्तूर है
जिसे जितना चाहोगे उसे उतना दूर पाओगे…!!

मैं कईं अपनों से वाक़िफ़ हूँ जो पत्थर के बने ह

झूठ बोलते है वो जो कहते हैं,
हम सब मिट्टी से बने हैं  | 
मैं कईं अपनों से वाक़िफ़ हूँ
जो पत्थर के बने हैं |

“कीमत” से नही“ किस्मत” से मिला करते ह

खरीद सकते उन्हें तो
अपनी जिंदगी देकर भी खरीद लेते ,
पर कुछ लोग “कीमत” से नही“
किस्मत” से मिला करते हैं ।

इनसान इतना मगरूर क्यों होता ह

इतनी शिद्दत से चाहा जाए
तो पत्थर भी अपने हो जाते हैं
           ऐ खुदा..
न जाने ये मिट्टी का इनसान
इतना मगरूर क्यों होता ह