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चक्रधर

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गुजरात के एक 27 वर्षीय छात्र
जो नेसनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन  (NID)
के सेकंड इयर के स्टूडेन्ट है।
जीनके द्वारा बनाया गया लोगों बुलेट ट्रेन के लीए सिलेक्ट किया गया।
सफलता उन्हें एकाएक नहीं मिली। इससे पहले लोगों के लिए केंद्र की एक दो नहीं बल्कि 30 प्रतियोगिताओं मे वह नाकाम हो चुके थे।
असफलताओं से जंग हार कर वो हार नहीं माने
उन्होंने एक बार फीर बुलेट ट्रेन के लिए लोगों बनाया असफलता 27 वर्षीय नौजवान का हिम्मत नहीं तोड़ पाई।
वह हर बार नया लोगों बनाता और प्रतियोगिता मे भाग लेता रहा। और आखिरकार
सफलता ने आकर कदम चुम लीया।
आखिरकार बुलेट ट्रेन के लिए उनका लोगों चुना गया।
लोगों बनाने के जुनून के चलाते दोस्त उन्हें लोगों मैंन के नाम से बुलाते थे।
लेकिन उन्हें इस बात की कोई परवाह नही था के कोने क्या कहता हैं
उन्हें ईस लोगों बनाने की जुनून ने उन्हें बुलेट ट्रेन के लोगों के सिलेक्शन करा के सफलता के सीढ़ियों पर कदम रखा और उन्हें एक लाख रूप्ये का पुरूषकार भी मीला।
लोगों के डिजाइन का खास बात -
लोगों बुलेट ट्रेन की तरह दीखता है
साथ ही उनका लोगों गतिमान चीते की रफ्तार को उभारता है।
क्या आप जानना चाहेंगे उस महान आदमी का नाम.....
उस महान आदमी के नाम सुनकर एक बार आप तालीयो के गुन्ज से उनके कामयाबी को सलाम जरूर करे
उस महान आदमी का नाम है "चक्रधर"


मै मोहम्मद मजहर नेसार अच्छी चीज जहाँ से भी मीले मैं लेलेता हू।
और सलाम है हर उस सख्स को जीसने
असफलता से हार नहीं मानी।
ईस तरह के और सफल लोगों लोगों
जिनहो ने इतिहास रचा उनके
सफलता का कहानी मेरे वेब साइट पर
उपलब्ध है
अधिक जानकारी के लिए लाॅग ऑन करे
www.achhiblog.blogspot.com

अंहकारी पक्षी का अहंकार का अंत|

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पक्षियों की सभा ही रही थी |
सभा में तय होना था कि उनका राजा कोन बनेगा|
इस मुदे पर कुछ पक्षी लड़ने लगे |
यह देख कर सबसे बुज़ुर्ग पक्षी,
जिसे सभी लोग संत कहते थे ने कहा,
“राजा वाही बन सकता है जिसमें ताकत हो,
सूझभूझ हो और जो अपने समाज को
एकजुट रख सके |
यह सुन सभी पक्षी एक दुसरे को देखने लगे |
उसी समय एक पक्षी ने खड़े होकर कहा,
“में सबसे शक्तिशाली हू इसलिय में राजा बनूगा |
उसकी बगल में पंख फेलाए दुसरे पक्षी ने कहा,
“तुमसे जयादा शक्तिशाली और बुदिमान में हू |
इसलिय राजा बनने का मोका मुझे मिलना चाहिय |
’ जब सर्व्सम्ह्ती से तय नहीं हुआ कि राजा कोन बने
तो संत ने कहा,
‘तुम दोनों लड़ो |
जो जीत जाएगा वही राजा बनेगा |
’दोनों आपस में लड़ने लगे |
पहले वाले पक्षी ने छल कपट से जीत हासिल कर ली |
संत ने उसे विजयी घोषित कर दिया |
सभी विजयी पक्षी के इर्द गिर्द जमा होकर उसका गुणगान करने लगे |
विजयी पक्षी चाहता था
कि उसके राजा बनने की बात आसपास के सभी पक्षीजान ले |
इसलिय इठलाता हुआ पेड़ की डाल पर बेठ गया
और अकड कर उची आवाज में बोला,
‘सब लोग देखो मुझे |
में हू विजयी पक्षी |
में राजा बन गया हू |

’ तभी ऊपर से एक चील ने उस पर झपटा मारा
और उसे अपने पंजे में दबा कर उड़ गया |
पक्षियों की सभा में हडकंप मच गया
और सब आंसू बहाने लगे |

पक्षियों का संत बोला – तुम लोग आंसू क्यों बहारहे हो?
तुम्हे तो खुश होना चाहिए |
’ एक पक्षी ने पूछा, ‘आखिर क्यों?
’ संत ने कहा, तुम लोग ने देखा होगा कि राजा बनने पर उसमें कितना अहंकार आ गया था |
वह अंहकार वश अपना गुणगान खुद कर रहाथा |
एक अंहकारी राजा से हमे इंतनी जल्दी मुक्ति मिल गई |
यह तो हमारे समाज का सोभाग्य है |
अंहकारी राजा कभी भी अपने समाज को सुरक्षा नहीं दे सकता |

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©® MD Mazhar Nesar

story of singar जूलियो

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जब जूलियो 10 साल का था
तो उसका बस एक ही सपना था ,
अपने फेवरेट क्लब रियल मेड्रिड की ओर से फुटबाल खेलना !
वह दिन भर खेलता,
प्रैक्टिस करता
और धीरे-धीरे वह एक बहुत अच्छा गोलकीपर बन गया.
20 years का होते-होते उसके बचपन का सपना हकीकत बनने के करीब पहुँच गया;
उसे रियल मेड्रिड की तरफ से फुटबाल खेलने के लिए साइन कर लिया गया.
खेल के धुरंधर जूलियो से बहुत प्रभावित थे
और ये मान कर चल रहे थे
कि बहुत जल्द वह स्पेन का नंबर 1 गोलकीपर बन जायेगा.

1963 की एक शाम ,
जूलियो और उसके दोस्त कार से कहीं घूमने निकले.
पर दुर्भाग्यवश उस कार    का एक भयानक एक्सीडेंट हो गया ,
और रियल मेड्रिड और स्पेन का नंबर 1
गोलकीपर बनने वाला जूलियो हॉस्पिटल में पड़ा हुआ था ,
उसके कमर के नीचे का हिस्सा पैरलाइज हो चुका था.
डॉक्टर्स इस बात को लेकर भी आस्वस्थ नहीं थे कि जूलियो फिर कभी चल पायेगा,
फ़ुटबाल खेलना तो दूर की बात थी.
वापस ठीक होना बहुत लम्बा और दर्दनाक अनुभव था.
जूलियो बिलकुल निराश हो चुका था ,
वह बार-बार उस घटना को याद करता और क्रोध और मायूसी से भर जाता.
अपना दर्द कम करने के लिए वह रात में गाने और कविताएँ लिखने लगा.
धीरे- धीरे उसने गिटार पर भी अपना हाथ आजमाना शुरू किया
और उसे बजाते हुए अपने लिखे गाने भीगाने लगा.

18 महीने तक बिस्तर पर रहने के बाद ,
जूलियो अपनी ज़िन्दगी को फिर से सामान्य बनाने लगा.
एक्सीडेंट के पांच साल बाद उसने एक सिंगिंग कम्पटीशन में भाग लिया
और ” लाइफ गोज ओन द सेम ” गाना गा कर
फर्स्ट प्राइज जीता.
वह फिर कभी फ़ुटबाल नहीं खेल पाया
पर अपने हाथों में गिटार और होंठों पे गाने लिए जूलियो इग्लेसियस संगीत की दुनिया में
Top Ten सिंगर्स में शुमार हुआ ,
और अब तक उनके
30 करोड़ से अधिक एल्बम बिक चुके हैं.

www.achhiblog.blogspot.in
©® MD Mazhar Nesar

Rooti k badle Zindagi

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Hiqayat :
Ek Aurat Hamesha
Apne Ghar Waalo Ke Liye Roti Pakaati Tou Ek Roti Khidki Ke Bahar Rakh Deti,
Yeh Soch Kar Ki Koi Bhuka Faqir Aayega Tou Ye Roti Utha Kar LeJayega Aur Dua Dega.
Jab Woh Aurat Khidki Par Roti Rakhti Tou Ek Faqir Waha Par Aata
Aur Uss Roti Ko UthaKar Chal Deta. Aur Bolte Jaata Ki
“Jo Tum Bura Karoge Woh Tumhare Saath Rahega
Aur Jo Tum Accha Karoge Woh Tum Tak Laut Aayega”
Din Guzarte Gaye
Aur Ye Silsila Chalta Raha,
Woh Faqir Roti Le Kar chsls Jata
Aur Yehi Baat Bad-badata.
Jab Uss Aurat Ko Iss Faqir Ki
Harkat Se Taklif Hone Lagi,
Aur Aurat Khyayal Karti Ki
Kaisa Faqir Hai Jo Shukriya
Ke Lafz Nahi Bolta
aur Naa Hr Dua Deta
Aur Kuch Ulta Sidha He
Bad-badata Chal Deta Hai!!!

Iska Kiya Matlab Hoga!!
Ek Din Uss Aurat Ke
Gusse Ka Koi Thikana Na Raha
Aur Usne Mann Hee Mann
Soch Liya Ki Iss Faqir Se
Nijat Paani Hai.
Aur Iss Iraade Se Usne
Faqir Waali Roti Me
Zaher Mila Diya.
Par Jab Woh Khidki Par
Woh Roti Rakhne Gai
Ki Uska Zameer Jaag Utha
Aur Bolne Lagi Ki Yeh Woh Kaisi Harkat Karne Ja Rahi Hai!!
Kisi Garib Ki Jaan Lena Chahti Hai!!
Bas Yeh Soch Kar Usne
Zaher Waali Roti Jaala Di
Aur Phir Se Achchi Roti
Banaa Kar Khidki Par Rakh Di.
Aur Woh Faqir Aaya
Aur Roti Utha Kar Wahi Baat Bad-badate Jane Laga
Ke, “Jo Tum Bura Karoge
Woh Tumhare Saath Rahega
Aur Jo Tum Achcha Karoge
Woh Tum Tak Laut Aayega
Har Roz
Jab Woh Aurat Khidki Par
Roti Rakhti Tou Woh Apne Ek Khoye Huwe Bete Ki Salamati Ki Dua Karti,
Isi Ummid Se Woh Roti Rakhti Ki
Jo Barso Pehle Uska Beta Kho Gaya Tha
Woh Wapas Ghar Par Aajaye.
Aur Arso Se Ab Tak Koi Uski Khabar Nahi Thi.
Ussi Roz Shaam Ko
Kisi Ne Darwaze Par Dastak Di,
Jab Uss Aurat Ne Darwaza Khola
Tou Usne Apne Bete Ko Paya.
Magar Beta Bahot Kamzor
Aur Chalne Ke Laaik Na Tha.
Behad Hee Dubla-Patla
Aur Taqat Se Khali Tha,
Bhuk Se Uski Haalat Kharab Hoti Ja Rahi Thi.
Jaise He Usne Apni Maa Ko Dekha To Bola Ki Maa Ye Ek Karaamat Hee Hai Ki Me Aaj Zinda Hu.
Kuch Meel Door Meri Haalat Bhuk Se Itni Khasta Thi
Ki Mai Ek Kadam Bhi Chal Nahi Paa Raha Tha.
Naa Waha Koi Insaani Aabadi Thi
Naa Kuch Khane Pine Ko.
Agar Aise Hee Chalta To Wahi Par Marr Jaata.
Par Waha Se Ek Faqir Ka Guzar Huwa,
Jisne Meri Haalat Par Taras Khai
Aur Usne Apne Thaile Se
Ek Roti Nikaal Kar Mujhe Khilai
Aur Bola Ki Roz To Ye Roti Mai Hee Khata Hu,
Par Aaj Iski Zaroorat Mujse Ziyada Tujhe Hai,
Ise Kha Le.
Bas Wahi Roti Kha Kar Mujhe Apne Ghar Tak Pahuchne Ki
Taqat Mili Aur Yaha Tak Pahuch Saka.
Jaise Hi
Maa Ne Iss Baat Ko Suna
Ki Uska Chehra Pila Pad Gaya
Aur Apne Aap Ko Sahara Dene
Darwaze Par Haath Rakh Diya
Aur Sochne Laagi
Ki Mere Bete Ko Jisne Roti Di
Woh Faqir Agar Wahi Tha
Jo Meri Khidki Se Roti Le Jaata
Aur Kehta Ki
“Jo Tum Bura Karoge
Woh Tumhare Saath Rahega
Aur Jo Tum Accha Karoge Woh Tum Tak Laut Aayega”.
Agar Wahi Faqir Tha To
Aaj Mai Kiya Karne Ja Rahi Thi..?
Aaj Tou Maine
Uss Faqir Ke Liye Zaher Waali Roti Rakh Di Thi,
Agar Woh Roti Me Wapas Nahi Leti To Wahi Roti Woh Faqir Anjane Mei Mere Hi Bete Ko De Deta
Aur Mera Beta Wahi Par Marr Jata!!
Yeh Soch Woh Khub Roi
Aur Sharminda Huwi
Apni bure sonch par.
Aur Usse Faqir Ke Lafzo Se Taklif Hoti Thi
Woh Bhi Samaj Me Aagaya
Ki Beshaq “
Jo Tum Bura Karoge
Woh Tumhare Saath Rahega
Aur Jo Tum Accha Karoge
Woh Tum Tak Laut Aayega”.

~°~°~°~°~°~°~
Azeez Dosto Shayad Yeh Wakiya Ek Khayali Baat Hee Ho,
Lekin Ye
Intehayi Haqiqat Hai Ke, Hamare Bure Amaal Hamare Sath Hee Rahenge
Aur Hamare Acche Amaal
Hum Tak Jarur Lout Aayenge.
Lihaza Hamesha Accha Karo,
Aur Accha Karne Se
Apne Aap Ko Naa Roko,
Phir Chahe Bhale
Uss Waqt Na Koi Taarif Karne Waala Ho
Naa Koi Dekhne Waala.
Allah Taala Hume Amal Ki Toufiq De .
Aameen suma Aameen ya Rabul Aalameen
Ham sabko Insaniyat ka Rasta dikha
ya rabbul aalemeen Ham sabko aun logo k rasto  se door rakgna
jinke upat tune apna gajab dhaya

®Zeba Shaikh
    Rajeshthan

दिल को छु लेने वाली दो दोस्तो की सच्ची कहान

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दिल को छु लेने वाली सच्ची कहानीः-
दो दोस्त थे,
सगे भाईयो से ज्यादा प्यार था उनमें।
एक दुसरे के बिना एक पल भी नहीं रह पाते थे।
अगर दूर होते तो फेसबुक पे एक दुसरे की
वाल पे छेड़खानी
और हँसी मजाक पोस्ट करते रहते थे।
एक बार किसी बात पे
उनमें बहुत ज्यादा मतभेद हो गया।
दोनो एक दुसरे से बोलचाल बन्द कर दिये।
फेसबुक पे भी दोनो अनफ्रेण्ड हो गये।
एक हफ्ता बाद
एक दोस्त अपना सारा इगो भूल कर के
दुसरे को फोन मिलाया।
पर फोन नहीं लग पाया।
वो उसके घर गया
तो देखा की दुसरा दोस्त बेड पर पड़ा है।
उसकी तवियत सिरियस थी।
दोनो दोस्त गले मिलकर खूब रोये।
फिर बैठ कर काफी देर बाते की।
बिमार दोस्त ने कहा की
वादा कर
तू हमेशा मेरे फेसबुक वाल पे पोस्ट करता रहेगा।
पहले दोस्त ने वादा कर दिया।
घर आकर उसने अपने बिमार दोस्त को
फ्रेण्ड रिक्वेस्ट भेज दिया।
मगर बिमार दोस्त औनलाईन ना होने की वजह से
रिक्वेस्ट तक नहीं एक्सेप्ट कर पाया।
अचानक सुबह पता चला की
बिमार दोस्त की मौत
उसकी जिन्दगी को मात दे दि।
आज वो दोस्त अपने दुसरे दोस्त के वाल पे
'मिस यु'लिखने के लिये तड़पता है।
पर लिख नहीं पाता।
आज तक फ्रेण्ड रिक्वेस्ट पेन्डिंग है उसकी।

* दोस्तो चार दिन की जिन्दगी है *
आपस में मनमुटाव होते है।
मगर उसे जितना जल्द हो सके
दूर कर लेना चाहिये।
क्योंकी समय किसी को
पछताने का मौका तक नहीं देता।।।

सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन.

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एक जाने-माने स्पीकर ने
हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए
अपनी सेमीनार शुरू की.
हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,
” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?”
हाथ उठना शुरू हो गए.

फिर उसने कहा ,
” मैं इस नोट को
आपमें से किसी एक को दूंगा
पर  उससे पहले
मुझे ये कर लेने दीजिये .
” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में
चिमोड़ना शुरू कर दिया.
और  फिर उसने पूछा,
” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?”
अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.

“अच्छा”
उसने कहा,
” अगर मैं ये कर दूं ?
” और उसने नोट को
नीचे गिराकर
पैरों से कुचलना शुरू कर दिया.
उसने नोट उठाई ,
वह बिल्कुल चिमुड़ी
और गन्दी हो गयी थी.

” क्या अभी भी कोई है
जो इसे लेना चाहता है?”.
और एक  बार  फिर
हाथ उठने शुरू हो गए.

” दोस्तों  , आप लोगों ने आज
एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है.
मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया
पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे
क्योंकि ये सब होने के बावजूद
नोट की कीमत घटी नहीं,
उसका मूल्य अभी भी 500 था.

जीवन में कई बार हम गिरते हैं,
हारते हैं,
हमारे लिए हुए निर्णय
हमें मिटटी में मिला देते हैं.
हमें ऐसा लगने लगता है कि
हमारी कोई कीमत नहीं है.
लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो
या भविष्य में जो हो जाए ,
आपका मूल्य कम नहीं होता.
आप स्पेशल हैं,
इस बात को कभी मत भूलिए.

कभी भी बीते हुए कल की निराशा को
आने वाले कल के सपनो को
बर्बाद मत करने दीजिये.
याद रखिये आपके पास
जो सबसे कीमती चीज है,
वो है आपका जीवन.”

स्वाद अपनी मेहनत की कमाई से सिंकी रोटी में ह

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हातिम और एक लकड़हारा

स्वाद अपनी मेहनत की कमाई से सिंकी रोटी में है,

हातिम अरब के एक कबीले का सरदार था।
वह बहुत बड़ा दानी था।
परोपकार की भावना उसमें कूट-कूट कर भरी हुई थी।
एक शाम कुछ लोग हातिम के पास बैठे थे।
उनमें से एक ने पूछा,'हातिम साहब,
क्या आपने कभी अपने से बड़े आदमी को देखा है?'
हातिम बोला, 'हां,
मैंने अपने आप से बहुत बड़ा एक इंसान देखा है।
जो बहुत ही साहसी, परिश्रमी और ईमानदार था।' '
लोग ने पूछा वह कौन था
मेहरबानी करके हमें बताइए कि वह कौन था
और कहां था?
आप से वह किस तरह से बड़ा था?'
सभी ने उत्सुकतापूर्वक एक साथ जानना चाहा।
हातिम ने बात आगे बढ़ाई, '
एकदिन अरब के कुछ मालदारों के लिए मैंने बड़ी दावत रखी।
वैसे उस दावत में कोई भी शामिल हो सकता था।
मैंने कभी किसी को मना किया ही नहीं।' '
सारा इंतजाम करने के बाद
मैं किसी काम से जंगल की ओर निकल गया।
जंगल में मुझे सूखी लकड़ियों का गट्ठर
सिर पर उठाए एक लकड़हारा आता मिला।
मुझे उस पर बहुत तरस आया।
उसका शरीर भी लकड़ियों की तरह सूखा हुआ था।'
मैंने अपना परिचय दिए बिनाही उससे कहा,
'भाई लकड़हारे,बेकार में ही लकड़ियों का बोझ
अपने सिर पर उठाए, क्यों मारे-मारे फिर रहे हो?
इससे अच्छा था कि हातिमके यहां चले जाते
और उसके द्वारा दी जा रही दावत में माल उड़ाते।'
लकड़हारे ने बड़ी सहजता से उत्तर दिया -
सुनिए साहब,
जो स्वाद अपनी मेहनत की कमाई से सिंकी रोटी में है,
वह हातिम के अहसान की आंच से सिंकी रोटी में नहीं।'
लकड़हारे की बात सुनकर मैं हतप्रभ रह गया।
मुझे लगा कि यह बहुत बड़ा इंसान है
और मैं उसके सामने बहुत ही बौना हूं।

तो मित्रों (My Dear Friend)
Life k pichhe bhago
Lanch k piche nahi
यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है|
जब कोई परेशानी आती है तो इंसान घबराकर हार मान लेता है
लेकिन हमें बिना डरे प्रयास करते रहना चाहिए
यही इस कहानी की शिक्षा  है
और मैं आशा करता हूँ
मेरा इस कहानी को लिखना जरूर सार्थक होगा
Insha ALLAH

अवसर -Time, Moka

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अवसर -प्रेरक कहानी



एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया ।
उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे।
पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था
और पैरोँ मे पंख थे।
एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।
ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?
दुकानदार ने कहा – अवसर का ।
ग्राहक ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?
दुकानदार ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर
आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।
ग्राहक ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?
दुकानदार ने कहा – वह इसलिये
कि यह तुरंत वापस भाग जाता है,
यदि इसका उपयोग न हो
तो यह तुरंत उड़ जाता है ।
ग्राहक ने पूछा – और यह दूसरे चित्र मे
पीछे से गंजा सिर किसका है?
दुकानदार ने कहा – यह भी अवसर का है ।
यदि अवसर को सामने से ही
बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका है ।
अगर आपने उसे थोड़ी देरी से
पकड़ने की कोशिश की तो
पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा
और वो फिसलकर निकल जायेगा ।
वह ग्राहक
इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था
पर अब वह बात समझ चुका था ।
आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुनाहोगा
या खुद भी कहा होगा
कि ’हमे अवसर ही नही मिला’
लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने
और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है ।
भगवान ने हमे ढेरो अवसरो के बीच जन्म दिया है ।
अवसर हमेशा हमारे सामने से आते जाते रहते है
पर हम उसे पहचान नही पाते या पहचानने मे देर कर देते है ।
और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक जाते है
क्योकि हम बड़े अवसर के ताक मे रहते हैं ।
पर अवसर बड़ा या छोटा नही होता है ।
हमे हर अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिये ।

Dosto,
Ausar chhota ho ya bara Ausar-Ausar HOta hai
Rupya 1/- ho ya 1000/- ho wah Apne Aap me bahot BARA hai
Samay 1 Secend ho ya 1 Din ho Samay hota hai
Mouka(Ausar),Time Laut kar wapas nahi aata hai
Unse pucho samay ki kimat jinki train 1Secend k liye chhut jati hai,
Unse pucho samay jinki Sanse 1 Secend k liye chhut jati hai
Disto ,
Right Time is inesial face
Right Direction is Education
Education= Jankari
Jankari=kisi bhi kaam ka jankari lena
Sun kar, Dekh kar, Soch kar Ya Action se Education kahte hai!!!!!
और मैं आशा करता हूँ
मेरा इस कहानी को लिखना जरूर सार्थक होगा
Insha ALLAH

इसी पेड़ की तरह हमारे माता पिता भी होते ह

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एक बार की बात है
एक जंगल में सेब का एक बड़ा पेड़ था|
एक बच्चा रोज उस पेड़ पर खेलने आया करता था|
वह कभी पेड़ की डाली से लटकता
कभी फल तोड़ता कभी उछल कूद करता था,
सेब का पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता था|
कई साल इस तरह बीत गये|
अचानक एक दिन बच्चा कहीं चला गया
और फिर लौट के नहीं आया,
पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया
पर वह नहीं आया|
अब तो पेड़ उदास हो गया|
काफ़ी साल बाद वह बच्चा
फिर से पेड़ के पास आया
पर वह अब कुछ बड़ा हो गया था|
पेड़ उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ
और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा|
पर बच्चा उदास होते हुए बोला
कि अब वह बड़ा हो गया है
अब वह उसके साथ नहीं खेल सकता| 
बच्चा बोला -
की अब मुझे खिलोने से खेलना अच्छा लगता है
पर मेरे पास खिलोने खरीदने केलिए पैसे नहीं है|
पेड़ बोला उदास ना हो तुम मेरे फल तोड़ लो
और उन्हें बेच कर खिलोने खरीद लो|
बच्चा खुशी खुशी फल तोड़ के ले गया
लेकिन वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया|
पेड़ बहुत दुखी हुआ|
अचानक बहुत दिनों बाद
बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस आया,
पेड़ बहुत खुश हुआ
और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा
पर लड़के ने कहा
कि वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता
अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्यूंकी मुझे अपने बच्चों के लिए घर बनाना है|
पेड़ बोला मेरी शाखाएँ बहुत मजबूत हैं
तुम इन्हेंकाट कर ले जाओ
और अपना घर बना लो|
अब लड़के ने खुशी खुशी सारी शाखाएँ काट डालीं
और लेकर चला गया|
वह फिर कभी वापस नहीं आया|
बहुत दिनों बात जब वह वापिस आया
तो बूढ़ा हो चुका था
पेड़ बोला मेरे साथ खेलो पर वह बोला
की अब में बूढ़ा हो गया हूँ
अब नहीं खेल सकता|
पेड़ उदास होते हुए बोला
की अब मेरे पास ना फल हैं और ना ही लकड़ी
अब में तुम्हारी मदद भी नहीं कर सकता|
बूढ़ा बोला -
की अब उसे कोई सहायता नहीं चाहिए
बस एक जगह चाहिए
जहाँ वह बाकी जिंदगीआराम से गुजर सके|
पेड़ ने उसे अपने जड़ मे पनाह दी
और बूढ़ा हमेशा वहीं रहने लगा|

प्रेरक कहानी

मित्रों,
इसी पेड़ की तरह हमारे माता पिता भी होते हैं,
जब हम छोटे होते हैं
तो उनके साथ खेलकर बड़े होते हैं
और बड़े होकर उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं
और तभी वापस आते हैं
जब हमें कोई ज़रूरत होती है|
धीरे धीरे ऐसे ही जीवन बीत जाता है|
हमें पेड़ रूपी माता पिता की सेवा करनी चाहिए
ना की सिर्फ़ उनसे फ़ायदा लेना चाहिए|

और मैं आशा करता हूँ
मेरा इस कहानी को लिखना जरूर सार्थक होगा
Insha ALLAH

एक नन्हीं चिड़िया की प्रयास

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एक नन्हीं चिड़िया

बहुत समय पुरानी बात है,
एक बहुत घना जंगल हुआ करता था|
एक बार
किन्हीं कारणों से पूरे जंगल में भीषण आग लग गयी|
सभी जानवर देख के डर रहे थे की अब क्या होगा??
थोड़ी ही देर में जंगल में भगदड़ मच गयी
सभी जानवर इधर से उधर भाग रहे थे
पूरा जंगल अपनी अपनी जान बचाने में लगा हुआ था|
उस जंगल में एक नन्हीं चिड़िया रहा करती थी,
उसने देखा क़ि सभी लोग भयभीत हैं ,
जंगल में आग लगी है मुझे लोगों की मदद करनी चाहिए|
यही सोचकर वह जल्दी ही पास की नदी में गयी
और चोच में पानी भरकर लाई और आग में डालने लगी|
वह बार बार नदी में जाती और चोच में पानी डालती|
पास से ही एक उल्लू गुजर रहा था ,
उसने चिड़िया की इस हरकत को देखा ,
और मन हीमन सोचने लगा
बोला क़ि ये चिड़िया कितनी मूर्ख है ,
इतनी भीषण आग को ये चोंच में पानी भरकर कैसे बुझा सकती है|
यही सोचकर वह चिड़िया के पास गया
और बोला कि तुम मूर्ख हो
इस तरह से आग नहीं बुझाई जा सकती है|
चिड़िया ने बहुत विनम्रता के साथ उत्तर दिया-
“मुझे पता है कि मेरे इस प्रयास से कुछ नहीं होगा
लेकिन मुझे अपनी तरफ से best करना है,
आग कितनी भी भयंकर हो
लेकिन मैं अपना प्रयास नहीं छोड़ूँगी
”उल्लू यह सुनकर बहुत प्रभावित हुआ|

तो मित्रों,
(My Dear Friend)
यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है|
जब कोई परेशानी आती है तो इंसान घबराकर हार मान लेता है
लेकिन हमें बिना डरे प्रयास करते रहना चाहिए
यही इस कहानी की शिक है
और मैं आशा करता हूँ
मेरा इस कहानी को लिखना जरूर सार्थक होगा
Insha ALLAH

माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं

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* माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं *

~¤ बच्चा के मासूमियत ने  एक बहुत बढ़ा सबक  दिया  ।¤~

किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था ।
परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी ।
बूढ़ा बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार गया था,
चलते समय लड़खड़ाता था लाठी की जरुरत पड़ने लगी,
चेहरा झुर्रियों से भर चूका था
बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहा था।
घर में एक चीज़ अच्छी थी
कि शाम को खाना खाते समय पूरा परिवार
एक साथ टेबल पर बैठ कर खाना खाता था ।
एक दिन ऐसे ही शाम को जब सारे लोग खाना खाने बैठे ।
बेटा ऑफिस से आया था भूख ज्यादा थी
सो जल्दी से खाना खाने बैठ गया
और साथ में बहु और एक बेटा भी खाने लगे ।
बूढ़े हाथ जैसे ही थाली उठाने को हुए
थाली हाथ से छिटक गयी थोड़ी दाल टेबल पे गिर गयी ।
बहु बेटे ने घृणा द्रष्टि से पिता की ओर देखा
और फिर से अपना खाने में लग गए।
बूढ़े पिता ने जैसे ही अपने हिलते हाथों से
खाना खाना शुरू किया
तो खाना कभी कपड़ों पे गिरता कभी जमीन पर ।
बहु चिढ़ते हुए कहा –
हे राम कितनी गन्दी तरह से खाते हैं मन करता है
इनकी थाली किसी अलग कोने में लगवा देते हैं ,
बेटे ने भी ऐसे सिर हिलाया
जैसे पत्नीकी बात से सहमत हो ।
बेटा यहसब मासूमियत से देख रहा था ।
अगले दिन पिता की थाली
उस टेबल से हटाकर एक कोने में लगवा दी गयी ।
पिता की डबडबाती आँखे
सब कुछ देखतेहुए भी कुछ बोल नहीं पा रहीं थी।
बूढ़ा पिता रोज की तरह खाना खाने लगा ,
खाना कभी इधर गिरता कभी उधर ।
छोटा बच्चा अपना खाना छोड़कर ,
लगातार अपने दादा कीतरफ देख रहा था ।
माँ ने पूछा क्या हुआ बेटे तुम दादा जी की तरफ
क्या देख रहे हो और खाना क्यों नहीं खा रहे ।
बच्चा बड़ी मासूमियत से बोला –
माँ मैं सीख रहा हूँ ,
कि वृद्धों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए,
जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और आप लोग बूढ़े हो जाओगे
तो मैं भी आपको इसी तरह कोने में खाना खिलाया करूँगा ।
बच्चे के मुँह से ऐसा सुनते ही बेटे और बहु दोनों काँप उठे
शायद बच्चेकी बात उनके मन में बैठ गयी थी
क्युकी बच्चा ने मासूमियत के साथ ,
एक बहुत बढ़ा सबक दोनों लोगो को दिया था ।
बेटे ने जल्दी से आगे बढ़कर पिता को उठाया
और वापस टेबल पे खाने के लिए बिठाया
और बहु भी भाग कर पानी का गिलास लेकर आई
कि पिताजी को कोई तकलीफ ना हो ।|

तो मित्रों ,
माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं
आप समाज में कितनी भी इज्जत कमा लें या कितना भी धन इकट्ठा कर लें
लेकिन माँ बाप से बड़ा धन इस दुनिया में कोई नहीं है
यही इस कहानी की शिक्षा है और मैं आशा करता हूँ
मेरा इस कहानी को लिखना जरूर सार्थक होगा
Insha ALLAH

कर्सनभाई पटेल : Ahmadabad Gujra

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सबकी पसंद निरमा।
वार्सिंग पाउडर निरमा...निरमा

कर्सनभाई पटेल : Ahmadabad Gujrat

सबकी पसंद निरमा। वार्सिंग पाउडर निरमा...!!कर्सनभाई पटेल एक किसान के बेटे, और इन्होने केमेस्ट्रीमें BSC की थी। गुजरात के एक शहर अहमदाबाद में इन्होने अपने करियर की शुरुआत की थी। उनकी सैलरी इतनी ज्यादा नहीं थी तो कुछ ज्यादा कमाने की कुछ बहतर करने की इच्छा थी।तो उन्होंने अपने स्किल्स को छान-बीन किया केमेस्ट्री में वो पढ़े लिखे थे, उसके बाद उन्होंने जॉब की थी जिसके साथ इनकी केमिकल्स में नॉलेज और अच्छा हो गया।तो उन्होंने जांच किया कि मेरी स्किल्स है: केमिकल में नॉलेज। फिर उन्होंने अपने स्किल्स के हिसाब से अपने अवसर को ढूँढना शुरू किया।उस समय पे 1960 में उन्होंने यह पता किया की वाशिंग पौदर्स बहुत महंगे है। और सारी कंपनी जोमार्किट है वो विदेशी है।और वाशिंग पाउडर के महंगे होने के वजह से, ज्यादातर माध्यम वर्ग के परिवार इतने महगे पाउडर खरीद नहीं पाते थे।फिर उन्होंने अपने स्किल्स और अवसर को मिलाया और अपने केमेस्ट्री के नॉलेज को उपयोग करते हुए बना डाला एक सस्ता और अच्छा वाचिंग पाउडर..। निरमा।कर्सनभाई पटेल जब जॉब पर जाते थे और वापस आते थे तो अपने साइकिल पर घर-घर में अपना बनाया हुआ वाशिंग पाउडर बेचते हुए जाते।उन्होंने वाशिंग पाउडर की कीमत 3 रूपए1 किल्लो ग्राम रखी थी। जबकि उस समय पे मार्केट में जो बाकि कंपनी के पाउडर थे उनकी कम से कम कीमत 30 रूपए थी।और क्योंकि उनको अपने क्वालिटी पर भरोसा था तो उन्होंने पैसे वापस करने की गारंटी भी देदी। खुद ही प्रोडक्ट बनाते थे। खुद ही प्रोडक्ट बेचते थे। और ऐसे अपनी रोज-रोज की महनत एक साथ वो अहमदाबाद की माध्यम वर्ग के लोगो में बिचमें अपने वाशिंग पाउडर को फेमस करते गये।लोग इस सस्ते और अच्छे पाउडर को ही खरीदने की इच्छा रखते थे। और धीरे-धीरे निरमा भारत के टॉप ब्रांड्स में आ गया।

1969 में घर-घर जाकर अपने साइकिल पे वाशिंग पाउडर बेचने वाले आज 600 मिलियन डॉलर

(38459970000.00 भारतीय रूपए) से ज्यादा के  मालिक है।

एक आदमी से शुरू की हुई निरमा में आज 14,000 लोग काम करते है।

यहप्रेरक कहानी(motivational story),

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